पूर्व सीएम रावत ने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी कार्य से पार्टी का संघर्ष कमजोर हो। प्रवर्तन निदेशालय ने उनके ओएसडी के परिसरों पर छापा मारा था। यह छापा 2016 की उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी धन शोधन जांच के संबंध में था। रावत ने अपने सहयोगी द्वारा किसी भी गलत काम के आरोपों से इन्कार किया। उन्होंने कहा कि टेलीविजन पर उनके निजी सहायक से नकदी और आभूषण जब्त होने की खबरें थीं।
रावत ने स्वीकार किया कि जीना उनके ओएसडी रहे हैं। उन्होंने पार्टी और सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने जीना को एक विनम्र और मेहनती व्यक्ति बताया। रावत ने कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ हुई है, तो उन्हें शर्म आएगी। हालांकि, उन्हें इस आरोप पर विश्वास नहीं है।
रावत ने भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि चुनाव तब होते हैं जब सीबीआई उनके दरवाजे पर आती है। इस बार उनके सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक कहानी गढ़ने का प्रयास किया गया है। रावत ने कहा कि ऐसे समय में यदि उनके किसी कार्य से पार्टी का संघर्ष कमजोर होता है, तो वह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे। इसलिए उन्होंने यह बड़ा निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि यदि जानबूझकर या अनजाने में उनसे ऐसा कोई कार्य हुआ है, जिससे राज्य के युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है, तो वह इसके लिए खुद को यातना का पात्र मानते हैं। उन्होंने राज्य के लोगों से इस चूक के लिए माफी मांगी। हरीश रावत ने अपील की कि यदि किसी व्यक्ति के पास ऐसी नियुक्तियों में उनके हस्तक्षेप का कोई सबूत है, तो वे उसे सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को अवश्य प्रदान करें। उन्होंने दोहराया कि यदि उनसे कोई चूक हुई है, तो वह खुद को दंड का पात्र मानते हैं और कानून को उन्हें दंडित करना चाहिए।