उत्तराखण्ड; देहरादून। प्रदेश में चारधाम यात्रा शुरू होने को है, लेकिन इसे लेकर पशुपालन विभाग की तैयारी आधी अधूरी हैं। पिछले साल एक्वाइन इन्फ्लूएंजा संक्रमण से कई घोड़े-खच्चरों की मौत के बाद भी अब तक विभाग के पास इसकी जानकारी नहीं है कि कितने घोड़े-खच्चर स्वस्थ और कितने बीमार हैं।
चारधाम यात्रा विशेषकर केदारनाथ में घोड़े-खच्चर बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए आवागमन का मुख्य साधन हैं, जो सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक सेवा देते हैं। 2025 में, एक्वाइन इन्फ्लूएंजा संक्रमण के कारण कई घोड़े-खच्चरों की मौत हो गई थी। अब जबकि अगले महीने से यात्रा शुरू हो रही है। विभाग की तैयारियां आधी अधूरी है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यात्रा मार्ग पर घोड़े खच्चरों के पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। ग्लैण्डर्स रोग की जांच के लिए सीरम सैंपल भी लिए जा रहे हैं, लेकिन अभी इसकी जांच रिपोर्ट नहीं मिली। यात्रा तैयारी के लिए गढ़वाल मंडल आयुक्त ने पिछले दिनों बैठक ली थी। बैठक में दिए निर्देशों का जल्द पालन किया जाएगा।
इलाज और पशु क्रूरता निगरानी के लिए तैनात होंगी सात टीमें
देहरादून। पशुपालन विभाग के निदेशक उदय शंकर के मुताबिक केदारनाथ यात्रा मार्ग पर सात, यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर तीन और हेमकुण्ड में दो टीमें पशुओं के इलाज और पशु क्रूरता निगरानी के लिए तैनात की जाएंगी। हर टीम में पशु चिकित्सा अधिकारी और पशुधन प्रसार अधिकारी तैनात रहेंगे।
1809 घोड़े खच्चरों के लिए सीरम सैंपल
देहरादून। पशुपालन विभाग के मुताबिक रोग अनुसंधान प्रयोगशाला श्रीनगर-गढ़वाल की ओर से अब तक 1809 घोड़े-खच्चारों के सीरम सैंपल लेकर ग्लैण्डर्स रोग की जांच की जा रही है।
6000 घोड़े खच्चरों का किया पंजीकरण
देहरादून। पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ उदय शंकर के मुताबिक रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में शिविर लगाकर घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण किया जा रहा है। अब तक 6000 पंजीकरण किए जा चुके हैं।
