उत्तराखंड; उत्तराखंड में अल्पसंख्यक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की सरकार की मंशा को झटका लगा है। राज्य में अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन एक जुलाई को मदरसा बोर्ड खत्म होने के बाद हुआ था। एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, मात्र एक फीसदी मदरसे ही शिक्षा विभाग और प्राधिकरण से मान्यता ले पाए हैं।
मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त 41 मदरसों में से अधिकतर ने अब तक मानक पूरे नहीं किए हैं। कुछ मदरसे मान्यता के लिए पत्रावली तैयार करने की बात कह रहे हैं। देहरादून के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की ओर से प्राधिकरण को सौंपी जांच रिपोर्ट में आया है कि कुछ मदरसों ने जहां जांच टीम को कोई भी सूचना देने से इनकार कर दिया है, वहीं, कुछ का कहना है कि शिक्षा विभाग और प्राधिकरण से मान्यता नहीं लेंगे।
देहरादून और नैनीताल में नहीं हुई बैठक : मदरसों की मान्यता के लिए ऊधमसिंह नगर में 11 मदरसों ने शिक्षा विभाग में आवेदन किया था, लेकिन मानक पूरे न होने से सभी आवेदन रद्द कर दिए गए। जबकि हरिद्वार में 18 में से सात मदरसों को मान्यता मिली है। इसके अलावा देहरादून और नैनीताल में इसे लेकर अभी बैठक नहीं हुई।
